Maun Kinare - Jitender Jayant - Books - Notion Press - 9781645879442 - September 5, 2019
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Maun Kinare

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जितेनà¥à¤¦à¥à¤° जयनà¥à¤¤ सन 1994 से शिकà¥à¤·à¤¾ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में पà¥à¤°à¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾ पक के पद पर कारà¥à¤¯ कर रहे हैं। नितà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¤à¤¿ बाल à¤à¤µà¤‚ यà¥à¤µà¤¾ मन से उनका साकà¥à¤·à¤¾à¤¤à¥à¤•ार होता रहता है। सामाजिक सरोकारों से रूबरू पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• नागरिक की तरह से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ भी होना होता है। कà¥à¤› बातें दिल में रह जाती है, कà¥à¤› दिमाग में कोलाहल के रूप में विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ रहती हैं। आज के दौर में उपभोकà¥à¤¤à¤¾ वादी व उनà¥à¤®à¤¾à¤¦à¥€ संसà¥à¤•ृति, सामाजिक à¤à¤µà¤‚ राज नैतिक संसà¥à¤•ृति में गिरावट के विरोध में सà¥à¤µà¤¾à¤­à¤¾à¤µà¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के रूप में जितेनà¥à¤¦à¥à¤° जयनà¥à¤¤ की रचनाà¤à¤ अपनी सारà¥à¤¥à¤• उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ दरà¥à¤œ कराती हैं। सà¥à¤µà¤¾à¤­à¤¾à¤µà¤¿à¤• रूप से कम बोलने वाले रचनाकार अपनी संजीदगी और संवेदनाओं को अपने शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में सारà¥à¤¥à¤• रूप पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैं। यदि इन बातों पर मौन धारण रखा जाठतो कायरता होगी और मौन के भंवर में संवेदनाà¤à¤‚ à¤à¤• भीषण चकà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¤ में परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ हो सकती हैं। अत शबà¥à¤¦ ही हैं जो भावनाओं को कि नारे लगाते हैं। यहीं कारण है इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• के सामने आने का जिसका नाम है "मौन किनारे"।

Media Books     Paperback Book   (Book with soft cover and glued back)
Released September 5, 2019
ISBN13 9781645879442
Publishers Notion Press
Pages 122
Dimensions 152 × 229 × 7 mm   ·   190 g
Language Hindi